मेरी भावना | Meri Bhavna Hindi

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मेरी भावना एक जैनो धर्म का पालन करने वालो के लिए बहुत ही मुख्या भावना होती है | मेरी भावना के रचयिता सुप्रसिद्ध लेखक कवि पं. जुगलकिशोर जैन मुख्तार “युगवीर” जी है | जिसने राग द्वेष कामादिक जीते सब जग जान लियासब जीवोको मोक्षमार्ग का निस्पृह हो उपदेश दियाबुध्ध, वीर, जिन, हरि, हर, ब्रम्हा, या उसको स्वाधीन कहोभक्ति-भाव से प्रेरित हो यह चित्त उसी में लीन रहो ||1|| विषयो की आशा नहि जिनके साम्य भाव धन रखते हैंनिज परके हित-साधन में जो निश दिन तत्पर रहते हैंस्वार्थ त्याग की कठिन…

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भक्तामर स्तोत्र संस्कृत | Bhaktamar Stotra in Sanskrit

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श्री भक्तमार स्तोत्र संस्कृत जैन समुदाय का सबसे प्रसिद्ध स्तोत्र है। भक्तमार स्तोत्र को सातवीं शताब्दी ईस्वी में आचार्य मनतुंगा द्वारा संस्कृत में 48 श्लोक लिखे गए हैं। भक्तमार स्तोत्र को आचार्य मनतुंग ने सलाखों में बैठे इस ग्रन्थ को लिखा था साथ ही इस ग्रन्थ की महिमा है की जैसे जैसे आचार्य मांगतुंग एक एक पद लिखते गए और उनकी सलाखों के ताले अपने आप खुलते चले गए थे | भक्तामर-प्रणत-मौलिमणि-प्रभाणा –मुद्योतकं दलित-पाप-तमोवितानम् ।सम्यक् प्रणम्य जिन पादयुगं युगादा-वालंबनं भवजले पततां जनानाम्॥ १॥ यः संस्तुतः सकल-वाङ्मय- तत्व-बोधा-द्-उद्भूत- बुद्धिपटुभिः सुरलोकनाथैः।स्तोत्रैर्जगत्त्रितय चित्त-हरैरुदरैःस्तोष्ये…

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भक्तामर स्तोत्र हिन्दी | Bhaktamar Stotra in Hindi

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श्री भक्तमार स्तोत्र जैन समुदाय का सबसे प्रसिद्ध स्तोत्र है। भक्तमार स्तोत्र को सातवीं शताब्दी ईस्वी में आचार्य मनतुंगा द्वारा संस्कृत में 48 श्लोक लिखे गए हैं। भक्तमार स्तोत्र को आचार्य मनतुंग ने सलाखों में बैठे इस ग्रन्थ को लिखा था| भक्त अमर नत मुकुट सु-मणियों, की सु-प्रभा का जो भासक।पाप रूप अति सघन तिमिर का, ज्ञान-दिवाकर-सा नाशक॥भव-जल पतित जनों को जिसने, दिया आदि में अवलंबन।उनके चरण-कमल को करते, सम्यक बारम्बार नमन ॥१॥ सकल वाङ्मय तत्वबोध से, उद्भव पटुतर धी-धारी।उसी इंद्र की स्तुति से है, वंदित जग-जन मन-हारी॥अति आश्चर्य की…

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